Sunday, March 16, 2008

मत कहो आकाश में कुहरा घना है -Dushyant Kumar

मत कहो आकश में कुहरा घना है
-दुष्यंत कुमार



मत कहो आकाश में कोहरा घना है
ये किसी की वयक्तिगत आलोचना है

सुर्या हमने भी नही देखा सुबह से
क्या करोगे, सुर्या को क्या देखना है

रक्त वर्षों से नसों में खौलता है
आप कहते हैं क्षनिक उत्तेजना है

दोस्तों! अब मन्च पर सुविधा नहीं है
आजकल नेपथ्य में सँभावना है

हो गयी है पीर परवत सी, पिघलनी चाहिये
इस हिमालया से कोई गंगा निकलनी चाहिये

आज ये दीवार परदों की तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिये

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लेहराते हुए, हर लाश चलनी चाहिये

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिये

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहिं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिये

3 comments:

Natasha said...

Hey...
thx a lot 4 visiting my blog and your comment...
:)
That would be so nice if you could understand the content...Actually It's not Arabic...It's Farsi(Persian)...But they are kinda same...
I would be glad...
I got the pics from different sites...That was kinda difficult, i had to find the pic which was kinda related to the text...so it took time...But I guess i did a good job...I mean I tried my best to find pics...And i do not mind...You can take as much as you what...This is the way it is...That's how life is...
:)
thx again...
good luck
<3
By the way...Your language is kinda cute...I mean the writing form...

Natasha said...

Hi...your welcome...I was kinda busy these days, so that's why I couldn't reply sooner...yea, i haveheard about your language, and i know you guys ca some how understand persian...
Yea , i know finding the differences between pesian and arabic for non natives are difficult...
and about the picture...yes thats my own picture...but i just made it black and white...
And i agree with you...thats so strange and some how funny, but that's the way life goes on...you meet different people with different languages and cultures...
and abot the orkut i have to say that search for my name...and then i guess you'll find me...same short hair with a white dress...
thx again...
Natasha
<3

Tilak Raj said...

अच्‍छा लगा यह देखकर कि आज की नौजवान पीढ़ी भी दुष्‍यन्‍त का संदर्भ रखती है। आपसे एक छोटी सी त्रुटि हुई है, शायद अनजाने में, आपने दो ग़ज़लें एक साथ जोड़ दी हैं।
और ये दोनों ग़ज़लें हिन्‍दी की हैं अरबी फारसी की नहीं।
तिलक राज कपूर